खबरों की वापसी?
खबर आई, चली और चली गयी । खबर की नियति ही यही होती है। बडी खबर थी इसलिए उसके भग्नावशेष अभी भी चहल कदमी कर रहे हैं । लेकिन जब खबर अपनी जवानी के चरम पर थी तभी एक गंभीर हिन्दी न्यूज़ चैनल ने कहा कि अब खबरें चैनल्स पर लौट आई हैं। लेकिन यह उदघोष एक भावातिरेक के सिवाय और कुछ नहीं निकला।
खुशी होती अगर यह भविष्यवाणी सही हो जाती। लेकिन एसा कुछ हुआ नहीं। होना भी नहीं था। जब तक ज्यादातर चैनल यही मान कर चल रहे हैं कि सिर्फ सांप बिच्छु, भूत की खबर ही असली खबर है तो सिर्फ एक चैनल के यह कहने से तो खबर टीवी पर लौट नहीं आएगी, और लौटी भी नहीं। संसद के सत्रावसान और बहुत सारी चीजों के देहावसान के अगले ही दिन लगभग सारे चैनल भूत, डायन और सौजन्यित हसीं का पिटारा लेकर यथास्थिति में वापस आ गए।
अब सवाल यह है कि गंभीर चैनल ने यह किस आधार पर कह दिया कि अब टीवी पर खबरों की वापसी हो गयी है। दो दिन के खेल से हफ्ते भर पहले इसी चैनल के एक समाचार सम्पादक ने हिन्दी के अखबार में भी लिखा कि संसद के सत्र के मद्देनज़र खबरें टीवी पर लौट रहीं हैं। सब कुछ ठीक है लेकिन यह खबरों के लौटने की ख़बर समझ नहीं आ रही है। वह जो खबर थी, वह खबर से ज्यादा एक उत्सुकता थी। सभी लागों को मालूम था कि इस दो दिन के खेल में फटाफट क्रिकेट और चालू सिनेमा वाले सारे मसाले मौजूद होंगें। यह खबर भी दर्शक के लिए एक मनोरंजन से भरपूर खबर थी। दो दिन का खेल शुरू होने से पहले ही चैनल्स ने जिस तरह से इस खबर को उठाना शुरू किया था तभी से इस खबर की नियति तय हो गयी थी, कि यह श्याम बेनेगल की नहीं बल्कि डेविड धवन की फिल्म देखने जा रहे है हम लोग।
जब एक प्रिन्स गढ्ढे में गिरता है और दो दिन तक सारे चैनल्स वही दिखाते हैं तो क्या वह खबर की वापसी नहीं बनती। सवाल खबरों की वापसी का नहीं ट्रीटमेंट का है कि हम खबर को कैसे ट्रीट करते है। हाँ वो दो दिन सचमुच बडे ही खबरीले थे. एक गंभीर खबर थी, लेकिन क्या उसको गंभीर रहने दिया गया? नहीं, हमने उसको भी खली वाला खेल बना डाला।
मेरी इस बकवास के हिसाब से फिर भी यह गंभीर चैनल की गम्भीरता ही थी कि उसके अलावा लगभग सारे ही चैनल्स पर उस खबर की ही खबर नहीं थी बाकी सब कुछ था। लेकिन अगर राजनीतिक ख़बर ही सिर्फ़ असली ख़बर है तो आने वाले दिन सचमुच ख़बर भरे दिन होंगे, चुनाव बहुत दूर नहीं। लेकिन असल मुद्दा फ़िर वही कि ख़बर का ट्रीटमेंट। ख़बर अगर नायिका है तो असली काम परदे के पीछे वाले का है कि वह उससे अभिनय करवाता है या अंग प्रदर्शन।



