Wednesday, 22 August 2012

चीन चीन चिल्ला कर टी आर पी बढ़ाये .....!!!

      चीन .............. चीन ............. चीन ................ चीनी ............................... चीनी ..........................................चीनी........................... . नहीं डायबिटीज   से सावधान रहने के लिए मैं बार बार चीनी का नाम नहीं ले रहा हूँ . चैनलों की चिल्लपों में चीन और चीनी सुन सुन के मुझे  वाकई डर लगने लगा है कि   डायबिटीज से मैं भले ही बच जाऊं लेकिन चीन से नहीं बच पाऊंगा . लगता है कि  मैं घर से निकलूंगा  और दरवाजे पर ही  एक चीनी आदमी मुझे मार डालेगा . 
              डर सिर्फ घर से बाहर निकलने पर ही नहीं घर के अन्दर भी लगने लगा है . अंग्रेजी वर्णमाला के आख़िरी अक्षर के नाम से चलने वाले एक समाचार चैनल के हिसाब से तो लगता है कि अब घर में आराम से बैठ कर टेलीवीजन भी नहीं देख सकते, कंप्यूटर   पर काम नहीं कर सकते  कि कहीं कोई चीनी स्क्रीन से निकल कर घर पे हमला न कर दे . अगर कोई चीनी आदमी  हमला नहीं भी करेगा तो, टीवी  में, कम्पूटर में  ऐसी तकनीक लगा दी है चीनियों ने कि   सारे घर के कार्यकलाप रिकॉर्ड कर लेगा . अब अपने घर में आदमी तो सब कुछ करता है तमाम सारे ऐसे क्रियाकलाप भी जिनका वर्णन यहाँ नहीं किया जा सकता . लेकिन सवाल यह है कि इन सब का वर्णन जानकर  चीन करेगा भी क्या ? समाचार चैनल को इस पर भी प्रकाश डालना चाहिए था .
                
                 अभी चंद रोज पहले इसी  समाचार चैनल में चल रहा था की चीनियों को टक्कर देने के लिए एक ऐसा इंजेक्सन बन रहा है जिसके लगाते ही जवान सियाचिन पर चढ़कर चीनियों को धूल चटा देगा .(लेकिन सियाचिन में तो बर्फ होती है, खैर.... चैनल इस पर भी प्रकाश डाल देता तो और अच्छा रहता. )

                   सबसे बड़ा रहस्योद्घाटन तो मेरे लिए यह था इसी चैनल का  कि महीने की शुरूआत में  जो बिजली के ग्रिड फेल हुए थे उनके पीछे भी चीन का हाथ था . उफ्फ़ !! कितने नादान हैं हम कि इसको अपने सिस्टम की ख़ता समझ रहे थे . मसला  सिर्फ ग्रिड जैसे मानवीय मामलों का ही नहीं बल्कि मई के महीने में मुल्क में मानसून की देरी जैसे प्राकृतिक मामलों  के पीछे भी भाई लोगों ने एक तूफ़ान को चीन द्वारा प्रायोजित घोषित कर दिया . 

                 मजे की बात यह है कि इस चीनी रायते को फ़ैलाने मैं किसी एक चैनल का योगदान नहीं है, बल्कि पूरे के पूरे सेटेलाइट में ही चीनी मिली हुई दिखाई देती  है, कुँए मैं भांग  की तर्ज़ पर . एक चैनल ने तो चीन से टक्कर लेने के लिए सीमा पर तमाम सारी सुरंगे बनवा कर उनमें सेना की "टुकडियां" भी तैनात करवा दीं .

                   शुक्र है कि आज किशोर कुमार जिन्दा नहीं हैं, अगर वो जिन्दा होते तो चील चील चिल्ला कर गाना नहीं गाते बल्कि वह गाते ........  चीन चीन चिल्ला कर टी आर पी बढ़ाये .....!!!


Labels: , , , ,

4 Comments:

At 23 August 2012 at 5:31 pm , Anonymous Anonymous said...

good analysis

 
At 27 August 2012 at 1:14 pm , Blogger Anshuman G Dutta said...

bahut mast...ek dam badhiya....umdaa bhi....saare channels pagla gaye hain yahan....main to dukhi ho gaya hoon...

 
At 27 August 2012 at 11:08 pm , Anonymous Anonymous said...

Sir, any one remembers Shailesh Kumar of India TV?

 
At 30 August 2012 at 11:44 am , Blogger gopal said...

दादाभाई...चैनल की फितरत पर अच्छी मार है..क्या बताया जाए... चैनल भी क्या करें...क्योंकि अब चैनल के मालिकों को एडीटर नहीं...बनिये की दुकान पर काम करने वाले ऐसे छोटू की जरूरत है, जिससे अगर कहा जाए कि अठन्नी बचाओ तो वो जोड़ जुगाड़ से किसी तरह 60 पैसे बचाने की कवायद में जुट जाता है...जाहिर है वो इतना तो समझता है कि लाला से बख्शीश तो मिलेगी नहीं, अलबत्ता अपनी मां बहनों के प्रति उनकी संवेदनाओं को जरूर आमंत्रित करवा लेगा। ऐसे में उनसे बुद्धिमत्तापूर्ण फैसलों की उम्मीद करना और किसी भी घटना, दुर्घटना में तमाशा न देखने के बारे में उनसे उम्मीद करना गलत होगा...
जरा सोचो और बताओ..तुमने आखिरी बार कब टीवी के पर्दे पर कोई विस्तृत चर्चा ऐसी सुनी जब उस विषय पर तुम्हारा ज्ञान वर्धन हुआ है...या कोई ऐसी बात जानने का मौका मिल गया जिसे तुम बर्षों से नहीं जानते हो..जो लोग ऐसी जानकारी रखते हैं उन्हें चैनल में बिठा तो लिया जाता है लेकिन बोलने का मौका नहीं दिया जाता। लिहाजा समाचार चैनल को उसकी रैंकिंग के हिसाब से नहीं समाचार की वरीयता के हिसाब से देखना चाहिए जैसे किसी जमाने में पंजाब केसरी को देखा करते थे...अपने मतलब की खबर को देख लिया और बाकी छोड़ दिया क्योंकि पता है उसकी सच्चाई कितनी सच है?
इसमें चैनल की बजाए अगर उसके प्रबंधन को सराहा जाए तो ज्यादा बेहतर होगा...क्योंकि उसी की बदौलत इन दिनों एडिटर्स की समझ रखने वाले पत्रकारों की बजाए, सड़कछाप मदारियों ने उस कुर्सी पर कब्जा कर लिया है और जब मदारी बैठेगा तो कलम नहीं चलेगी बल्कि बंदर ही नाचेगा।

 

Post a Comment

Subscribe to Post Comments [Atom]

<< Home