हाँ मैंने धमाका देखा !!
धन्य हो गया मैं । आखिरकार देख ही लिया । अभी तक वंचित रहा , लेकिन अब नहीं । अब मैं भी कुछ उन चंद गिने चुने खुशकिस्मतों में शुमार हो गया जो देख चुके हैं । ऊपर वालों की ऐसी महिमा रही कि मैंने भी देख लिया । अच्छा ये ऊपर वाले भी बड़े अजीब लोग हैं खुद नहीं देखते लेकिन नीचे वालों को दिखा देते हैं । ऊपर वाले हमेशा देख लेने वालों के ऊपर चले जाने के बाद देखने जाते हैं । समझदार हैं, ऐसे ही थोड़े न ऊपर वाले बन गए ।
लेकिन आप लोग उदास न हों वह दिन अब ज्यादा दूर नहीं । ऊपर वाले इस बात कि भरसक कोशिश कर रहें कि ज्यादातर देशवासी आये दिन ऐसे विहंगम दृश्य देख सकें और उनमे से जो ज्यादा भाग्यशाली हों वो ऊपर चले जाएँ ।
कल हाई कोर्ट के बाहर जो मैंने देखा वह यही "देखना" था । गनीमत यही रही कि वहां से गुजरते गुजरते मैं ज़हां से नहीं गुजर गया । वैसे हम लोग अब ग्लोबल सिटीजन बनने की राह पर हैं, अगर इराक, अफगानिस्तान और न जाने कौन कौन से "स्तान" जैसे विहंगम दृश्य अपने ही मुल्क में हो जायेंगे तो फिर हम भी ग्लोबल सिटिजन बन ही जायेंगे । ऊपर वाले वैसे बड़ी शिद्दत से इस काम में लगे हुए हैं ।
धमाके के तुरंत बाद मैंने सबसे पहले अपने कुछ मीडिया मित्रों को मोबैलयाया तो कुछ लोगों का कहना था कि पहले मीडिया क्यूँ , तो भाई मेरा ये मानना है कि अपने मुल्क में फोन करने पर पहले पहुँचने वालों में पहला नंबर पिज्जा वालों का और दूसरा नंबर मीडिया का है , और एक बार मीडिया आ जाए तो पुलिस आ ही जायेगी ।
खैर फिलहाल हम लोग जिन्दा हैं यही बहुत है , और ऐसे दृश्य देखने की आदत डाल लें ।
खुदा खैर करे !!
Labels: bomb blast, delhi, high court, खुदा खैर करे, धमाका

5 Comments:
bahut hi sahi likha hai.ab toh ghar se nikalate hue bhi ek shanka rahti hai ki.................
ये ऊपर वालों का करम है या खुदा का शुक्र कि आप वहां से गुजर चुके थे.....
लेकिन एक बार फिर कोशिश हुई थी रात को जब धरती कांप उठी थी...
ये कम्पन बी कहीं कोई साजिश तो नहीं थी...
badhiya !!
yah ab roz ka maamla ho gaya hai
good writing
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