Thursday, 8 September 2011

हाँ मैंने धमाका देखा !!

धन्य हो गया मैं । आखिरकार देख ही लिया । अभी तक वंचित रहा , लेकिन अब नहीं । अब मैं भी कुछ उन चंद गिने चुने खुशकिस्मतों में शुमार हो गया जो देख चुके हैं । ऊपर वालों की ऐसी महिमा रही कि मैंने भी देख लिया । अच्छा ये ऊपर वाले भी बड़े अजीब लोग हैं खुद नहीं देखते लेकिन नीचे वालों को दिखा देते हैं । ऊपर वाले हमेशा देख लेने वालों के ऊपर चले जाने के बाद देखने जाते हैं । समझदार हैं, ऐसे ही थोड़े न ऊपर वाले बन गए ।



लेकिन आप लोग उदास न हों वह दिन अब ज्यादा दूर नहीं । ऊपर वाले इस बात कि भरसक कोशिश कर रहें कि ज्यादातर देशवासी आये दिन ऐसे विहंगम दृश्य देख सकें और उनमे से जो ज्यादा भाग्यशाली हों वो ऊपर चले जाएँ ।



कल हाई कोर्ट के बाहर जो मैंने देखा वह यही "देखना" था । गनीमत यही रही कि वहां से गुजरते गुजरते मैं ज़हां से नहीं गुजर गया । वैसे हम लोग अब ग्लोबल सिटीजन बनने की राह पर हैं, अगर इराक, अफगानिस्तान और न जाने कौन कौन से "स्तान" जैसे विहंगम दृश्य अपने ही मुल्क में हो जायेंगे तो फिर हम भी ग्लोबल सिटिजन बन ही जायेंगे । ऊपर वाले वैसे बड़ी शिद्दत से इस काम में लगे हुए हैं ।



धमाके के तुरंत बाद मैंने सबसे पहले अपने कुछ मीडिया मित्रों को मोबैलयाया तो कुछ लोगों का कहना था कि पहले मीडिया क्यूँ , तो भाई मेरा ये मानना है कि अपने मुल्क में फोन करने पर पहले पहुँचने वालों में पहला नंबर पिज्जा वालों का और दूसरा नंबर मीडिया का है , और एक बार मीडिया आ जाए तो पुलिस आ ही जायेगी ।


खैर फिलहाल हम लोग जिन्दा हैं यही बहुत है , और ऐसे दृश्य देखने की आदत डाल लें ।


खुदा खैर करे !!

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