NDTV इंडिया और इमरान हाश्मी का मकान
इमरान हाशमी को मकान नहीं मिला , यह इमरान ने ख़ुद कहा है । सच्चाई कितनी है , यह भी वो ख़ुद ही जानते होंगे । लेकिन NDTV इंडिया को धन्यवाद । रवीश कुमार को शुक्रिया उन्होंने सच्चाई बता दी । नहीं तो आम दर्शक को पता ही नहीं चलता कि मुसलमानों के साथ इतना अन्याय हो रहा है । मैं कम से कम छः ऐसे मुसलमानों को जानता हूँ कि जो रिक्शा चलाते हैं , छः अन्य ऐसे मुसलमानों को जानता हूँ कि जो नाना प्रकार के नामों की सोसाइटी के दरवाजों पर दरजी का काम करते हैं । छः ऐसे मुसलमानों को जानता हूँ कि जो नाना प्रकार के स्तरों पर सरकारी या गैर सरकारी दफ्तरों में अपनी रोजी रोटी चलाते हैं । और कम से कम छः ऐसे मुसलमानों को जानता हूँ कि जो टीवी चैनल्स में काम करते हैं । यहाँ काम करने का मतलब मशीन चलाने से या OB वेन को ड्राइव करने से नहीं है । ये सभी मेरे दोस्त पत्रकारिता करते हैं ।
लेकिन इनमें से कोई भी इमरान हाश्मी या रवीश कुमार की तरह मशहूर नहीं है । शारिक खान भी नहीं । इमरान हाश्मी को मकान मिलने में मुश्किल हो रही है इस बात की सबसे अधिक चिंता NDTV इंडिया को हो रही है । रवीश भाई...... सॉरी रवीश सर ! प्राइम टाइम में आधे घंटे आप ने इमरान हाश्मी के बहाने मुल्क में फिरकापरस्ती ढूँढने में लगा दिए , उससे तो अच्छा होता की शरद पवार के बयान पर आधे घंटे खर्च कर देते की मुल्क में चीनी मंहगी हो जायगी क्योंकि गन्ने की पैदावार आधी हो गई है । कमसे कम मिठास की बात तो होती , राजनीति और मीडिया की कसैली बातों के परे । खैर यह आप का विशेषाधिकार है की क्या दिखाएँ और क्या नहीं ।
इमरान हाश्मी की बातों से मुझे सालों पहले की एक बात याद आ गई जब आज के MP अज़हरुद्दीन क्रिकेट खेलते थे पर क्रिकेट खेलने की बजाय क्रिकेट के एक अन्य मुद्दे पर घिर गए । तब उन्होंने बस पर सवार होते समय पर्चे गिराए थे की एक अल्पसंख्यक होने के नाते उन्हें फंसाया जा रहा है । और जब रवीश सर इमरान हाश्मी की मुश्किलें गिना रहे थे तभी देश के एक बड़े बुजुर्ग राजनेता भी यही तर्क दे रहे थे की उन्हें भी फंसाया जा रहा है उनके बेटे के मार्फत की उसने एक करोड़ की रिश्वत ली है और की वे अल्पसंख्यक हैं ।
नहीं रवीश सर ऐसे ही बात नहीं करते हैं NDTVमें काम करते हैं । सबूत के तौर पर उनके पास दर्शकों के SMS हैं ९५ फीसदी ने कहा की उन्हें दिक्कत होती है घर ढूँढने में मुस्लमान होने की वजह से । ठीक ही कह रहे हैं । लेकिन रवीश सर ये सभी ९५ फीसद लोग आम लोग हैं इमरान हाश्मी नहीं । इनमें से किसी ने भी शायद मल्लिका शेरावत या कंगना रानावत को रूबरू देखा होगा । और अपने इमरान हाश्मी इनके साथ तो .........(बीप) ........ (बीप) ....... । तो साहब ये अन्तर है इमरान हाश्मी और SMS करने वालों में ।
वैसे एक बात तो है इमरान हाश्मी को मैं भी अपना पड़ोसी नहीं बनाना चाहूँगा । नहीं नहीं मुसलमान होने की वजह से नहीं उनके साथ तो बहुत मजा आता है रहने में , स्वादिष्ट सेवैयाँ और गोश्त के साथ रूमाली रोटी क्या कोई कम वजह है । लेकिन इमरान हाश्मी वो खतर(नाक) शख्स है जिसकी वजह से हमें हिमेश रेशमिया की आवाज़ झेलनी पड़ी । और अगर यह शख्स पड़ोस में आ गया तो अपनी फिल्मों के गाने सुनेगा और सुनाएगा वह भी हिमेश रेशमिया की आवाज़ में ......उफ्फ्फ .....खुदा खैर करे !!!!
